आज के समय में भारतीय राजनीतिक दलों में होड़ लगी हुई है मुद्दों की बात न कर अपने आप को सबसे बड़ा दलित हितेषी साबित करने की और इसी के चलते पार्लियामेंट में एट्रोसिटी एक्ट को बार बार संशोधित किया जा रहा है जिसमें न तो संविधान में दिए गए प्रावधानों का पालन किया जा रहा है न ही सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जा रहा है अगर सरकार और राजनीतिक दलों को लगता है कि एट्रोसिटी एक्ट के तहत बगैर जाँच के FIR दर्ज होनी चाहिए, और बगैर फरियादी को सूचना दिए आरोपी की जमानत पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए, तो सरकार को इस एक्ट में इस तरह के संशोधन भी करना चाहिए:-
1. आरोपी की जमानत अर्जी पर सुनने से पहले जब फरियादी कोर्ट में उपस्थित होगा तो उसे कोर्ट के आदेशानुसार इस आशय का बंधपत्र और जमानत भरकर देना होगी कि फैसले के समय भी फरीयादी उपस्थित रहेगा और यदि प्रकरण में आरोपी बरी होता है तो फरियादी को उतने समय के लिए जैल भेज दिया जाएगा जितना कि यदि आरोप सिद्ध होने पर आरोपी को जेल भेजा जाता।
2. फरियादी को जेल भेजते समय दोषमुक्त व्यक्ति से जमानत और बंध पत्र इस आशय के लिए जाएंगे कि अपीलीय कोर्ट द्वारा फरियादी को दोषमुक्त किया जाता है तो पूर्व में दोषमुक्त को उतनी ही सजा दी जाएगी जितनी कि उसे निचली अदालत में दोषी पाए जाने पर होती, और जेल भेज दिया जायेगा, और यह प्रक्रम इसी तरह ऊपरी अदालतों में चलता रहेगा।
मेरे मतानुसार तो यही प्राकृतिक न्याय होगा और मुझे लगता है इस तरह कि मांग अजा अजजा पिवर्ग सामान्य वर्ग सभी को करनी चाहिए ताकि न तो कोई फर्जी FIR होगी न कोई दोषी बचेगा।
न्यायिक सिद्धांत तो यही कहते हैं कि:-
कोई निर्दोष फसे ना।
कोई दोषी बचे ना।।
भगवतीप्रसाद पुरोहित
एडव्होकेट
महिदपुर जिला उज्जैन
9098934064
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